नेपाल में नौ
राष्ट्रीय उद्यान और तीन वन्य प्राणी संरक्षित क्षेत्र हैं जिनके अंतर्गत दुनिया
के सबसे ऊंचे पर्वत और साथ ही तराई का समतल मैदान भी है। लुप्त होती नस्लों जैसे
रॉयल बंगाल टाइगर, एक
सींग वाला गैंडा (राइनोसेरस) और भरल इन पार्को में सुरक्षित हैं। दक्षिणी समतल
मैदानी इलाका जिसे ‘तराई’ के नाम
से जाना जाता है, घने
ट्रापिकल जंगलों से घिरा हुआ है। वहां की सफारी में हाथी की पीठ से लेकर जीप, नाव और
पैदल चलकर आकर्षक प्राकृतिक नजारों, जंगली जानवरों और
पक्षियों की गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है।यहां के कुछ खास राष्ट्रीय उद्यान
हैं:
चितवन नेशनल पार्क : पचास
से अधिक स्तनपायी जातियां,
55 पानी में रहने वाले जानवर और रेपटाइल्स (रेंगने वाले जानवर)
व पक्षियों की 532
जातियां यहां उपलब्ध है। एक सींगवाला गैंडा, बंगाल
टाइगर, गौर
(वोदा), हिरण, स्टि्रप्ड
हायना भी हैं।
वर्दिया नेशनल पार्क
यह सबसे बड़ा और बाधारहित
वनक्षेत्र है। यह लुप्त होते वन्य जंतुओं की विशिष्ट जातियां जैसे राइनोसेरेज, जंगली
हाथियों, बाघ, दुर्लभ
स्वांप हिरण (झावर हिरण) और कृष्ण मृग की किस्में सुरक्षित रखी गई हैं।
कोशी टप्पु वन्य जंतु
सुरक्षित क्षेत्र
यह पूर्वी नेपाल में स्थित है। मुख्य
रूप से इस क्षेत्र में दलदलयुक्त घास का मैदान है, झाडि़यों और पटेर का सघन
वन है। यहां जंगली अर्ना भैंसों की बहुतायत होने के कारण यह सुरक्षित क्षेत्र अपने
आप में अनूठा है। अन्य जानवरों में हाग हरिण (पाढा), वाइल्ड बोर (बनैला सूअर), चीतल, और नील
गायें, यहां
देखी जा सकती हैं। लुप्त हो रही जाति के घडि़याल, मार्श मगरमच्छ (दलदल में
रहने वाला) और गैंगेटिक (गंगा में पाई जाने वाली) डाल्फिनों को भी कोशी नदी में
देखा गया है।
राप्ती नदी से नीचे दक्षिण की ओर जाने
पर जल पक्षियों- नीले रंग के यूरेशियन, तेज यूरेशियन कौडि़ल्ला
(पनडुब्बी पक्षी), इग्रेट्स
(बगुला), आस्प्रे
(मछारंग) और रड्डी शेलड्रक्स (लाल चकवा) को देखा जा सकता हैं। पक्षियों को देखने
के लिए एक दूरबीन साथ हो तो मजा ज्यादा रहेगा। जंगल के बीच मे जाएं तो अनेक नए तरह
के आनंद लिए जा सकते हैं। तब आप रास्तों को छोड़कर जंगल के घने हिस्सों तक जा सकते
हैं। जहां सामान्यतया पर्यटक नहीं जा पाते। बस थोड़ा रोमांच प्रेम चाहिए।
हॉट एअर बैलूनिंग
हाट एअर बैलूनिंग नेपाल में पर्यटकों
द्वारा ज्यादा पसंद की गई है। इसमें परिंदे की तरह आसमान में उड़ान भरकर हिमालयी
पर्वतों की पृष्ठभूमि में काठमांडू का हवाई नजारा लिया जा सकता है। मौसम साफ हो तो
1500-2000 मीटर
की ऊंचाई से काठमांडू और हिमालय को देखने का यह सबसे रोमांचकारी तरीका है। उड़ान
काफी हल्की और बिना किसी तकलीफ के होती है जिसे महसूस भी नहीं किया जा सकता है।
आकाश में इस प्रकार विचरने के लिए सबसे अच्छा मौसम सर्दियों में अक्टूबर-अप्रैल का
होता है जिस समय पर्वत की चोटियां बर्फ से ढकी रहती हैं और साफ दिखाई पड़ती हैं।
पर्वतीय उड़ान (माउंटेन
फ्लाइट) : एक घंटे की पर्वतीय उड़ान
हिमालय के नजारे और बिना चढ़ाई किए नजदीक से एवरेस्ट और आठ हजार मीटर ऊंचाई वाले
अन्य पर्वतों का आसमानी दृश्य अद्भुत आनंद देता है। विश्व के सबसे ऊंचे पर्वत को
शांत आकाश से देखने के माउंटेन फ्लाइट के इस अनुभव की तुलना किसी से नहीं की जा
सकती। यूं अनेक घरेलू उड़ानें ऐसे पर्वतीय नजारे सालभर दिखाती हैं।
जेट स्कूटर
त्रिशूली की तीव्र जल धारा में जेट
स्कूटर देश के सबसे खूबसूरत नदी-मार्ग को खोजने का वास्तव में बड़ा नया और
रोमांचकारी तरीका है। छह किमी दूरी तक की यह सवारी काठमांडू से करीब 145 किमी
दक्षिण में नदी किनारे के रिसोर्ट थिमुरा, रामनगर, चितवन
से प्रारंभ होती है। स्कूटरों की गति क्षमता 80 किमी प्रति घंटा तक की
है। इस स्थल पर जंगल घूमने और पक्षी निहारने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।
यहां का एक अन्य आकर्षक पैकेज ‘सीता गुफा’ का
भ्रमण है। कहा जाता है कि सीता को अपने अंदर वापस समाने के लिए यहीं धरती फटी थी, जहां
से उसका जन्म हुआ था।
राफ्टिंग व कैनोइंग
नेपाल में हिमालय से निकलने वाली कुछ
बर्फीली नदियों के तेज प्रवाह की तुलना विश्व के कई प्रमुख राफ्टिंग नदियों से की
जा सकती है। ज्यादातर नदियां सर्पाकार रास्तों पर चलती हुई शांत घाटियों में शोर
करती-मचलती हुई अंतत: दक्षिणी तराई और भारत के मैदानी इलाकों से होकर गंगा में मिल
जाती हैं। नदी मार्ग पर सैर देश के आर-पार दोनों ओर के प्राकृतिक दृश्यों और
धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं को जानने का और साफ सुथरे पानी पर से गुजरने का
अविस्मरणीय आनंद प्रदान करता है। यूरोप में लोकप्रिय कैनोइंग यानी डोंगी खेना अब
नेपाल में भी उपलब्ध है। डोंगी खेते हुए सहज ही कई नई जगहों की अछूती खूबसूरती को
आप निहार सकते हैं, बस
थोड़े रोमांच के साथ।
केबल कार
केबल-कार हाल ही में नेपाल में संचालित
होनी शुरू हुई है। स्थानीय लोगों और सैलानियों के बीच यह शुरू से ही काफी लोकप्रिय
रही है। केवल दस मिनट का सफर पर्यटकों को देवी मनकामना के मंदिर तक पहुंचा देता
है। देवी मनकामना के बारे में कहा जाता है कि वे मांगने वाले की सभी इच्छाएं पूरी
कर देती हैं। मनकामना देवी का यह मंदिर काठमांडू से 125 किलोमीटर
दूर पश्चिम में है। काठमांडू-पोखरा राजमार्ग पर राजधानी से 104 किलोमीटर
दूर एक स्थान से यह केबल कार शुरू होती है।
मछुवाही (फिशिंग)
नेपाल की हिमालयी नदियों के साफ पानी
में 118
किस्म की मछलियां मिलती हैं- महासीर से लेकर पहाड़ी धारा
में विचरने वाली ट्राउट मछलियों की भी अनेक किस्में यहां मिलती हैं। सफेद पारदर्शी
जल में मछुवाही के लिए जाने का सब से अच्छा समय मानसून शुरू होने के पहले फरवरी से
अप्रैल तक और मानसून समाप्ति के बाद अक्टूबर और नवंबर में होता है। इन दिनों में
मछलियां अंडे देने के लिए पानी की ऊपरी सतह पर आ जाती हैं और कम से कम आहार ग्रहण
करती हैं। कुछ लोकप्रिय फिशिंग ट्रिप कर्णाली नदी, बर्दिया नेशनल पार्क में
की जाती है। चितवन की सेती और त्रिशूली में भी फिशिंग की कई जगहें हैं। पोखरा में
भाड़े पर मछली मारने वाले कांटे और वंशी भी मिल जाते हैं।
चूंकि विदेशी सैलानियों की आवक बहुत
ज्यादा है, इसलिए
इन सबके अलावा काठमांडू में विश्व स्तरीय बालिंग, डिस्को और वीडियो गेम
पार्लर और कैसिनो हैं जहां पर्यटक अपना समय बिता सकते हैं। यानी रोमांच के बाद मन
हल्का करने को जी चाहे तो उसके लिए भी कई मौके हैं।


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