Thursday, April 9, 2015

नेपाल के 10 सबसे फेमस टूरिस्ट लोकेशंस

नेपाल में ढेरों तीर्थस्थल हैं। यही वजह है कि इसे देवताओं का घर भी कहा जाता है। यहां देखने के लिए कई धार्मिक स्थल तो हैं ही, साथ ही यहां का प्राकृतिक सौंदर्य भी पर्यटकों को आकर्षित करता है। नेपाल का उत्तरी हिस्सा हिमालय पर्वत से घिरा हुआ है। विश्व की दस सबसे ऊंची चोटियों में आठ नेपाल में है। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट भी यहीं है। इसे स्थानीय लोग 'सागरमाथा' कहते हैं।यहाँ पर देखने लायक़ बहुत सही जगहें हैं| उन्हीं में से 10 तीर्थस्थलों का जिक्र आगे कर रहे हैं| 
                       
1. काठमांडू दरबार स्क्वेयर
काठमांडू में प्राचीन मंदिर, ऐतिहासिक इमारतें और कलात्मक स्मारकों को देखा जा सकता है। यहां पर कई ऐसे स्मारक और मंदिर हैं, जिन्हें यहां के राजाओं द्वारा बनवाया गया था। 1549 ईस्वी में राजा महेंद्र माला द्वारा बनवाया गया टालजू मंदिर है। इसके अलावा काल भैरव, बसंतपुर दरबार, नासल चौक, द हॉल ऑफ पब्लिक ऑडियंस, स्टेच्यू ऑफ किंग प्रताप माल्ला, बिग बैल, बिग ड्रम, जगन्नाथ मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, कृष्णा मंदिर मुख्य आकर्षण है। वहीं दरबार स्क्वैयर पर देखने के लिए और भी कई स्थान हैं।
                                        
2. श्याम बौद्धनाथ
बुद्धिस्ट चैत्य के लिए दुनिया में यह जगह अपने आप में खास है। यह तकरीबन 2000 साल पुरानी है। इसका स्ट्रक्चर खासतौर पर ईंट और मिट्टी से बनाया गया था। इसके शिखर को तांबे से तैयार किया है, जो दिखने में बहुत आकर्षक है। यह जगह काठमांडू शहर से 3 किमी दूरी पर है। यह घाटी से 77 मीटर ऊपर हिलॉक पहाड़ी पर स्थित है।
                                                  
3. बौद्धनाथ
बौद्धनाथ का स्तूप काठमांडू से 8 किमी दूर है। यह दुनिया का सबसे बड़ा स्तूप माना जाता है। लिच्छवी राजा काना देव ने इसे पांचवीं ईस्वी में बनवाया था।
                                                   
4. बुद्धनीलकांथा
यह काठमांडू के पूर्व में 8 किमी की दूरी पर स्थित है। यह शिवपुरी पहाड़ी पर बना है, जहां भगवान विष्णु की प्रतिमा शेषनाग पर लेटी हुई देखी जा सकती है। इसे नेपाल की सबसे बड़ी और सुंदर पत्थर की नक्काशी माना जाता है। पत्थर से बनी यह मूर्ति लिच्छवी पीरियड की है।
                               
5. चांगुनारायण मंदिर
इस मंदिर को यहां का सबसे पुराना मंदिर कहा जाता है। इसे चौथी शताब्दी में बनवाया गया था और दोबारा इसे 1702 में बनवाया गया था। यह काठमांडू के उत्तरी हिस्से में 22 किमी और भाक्तापुर के पूर्व में 4 किमी की दूरी पर स्थित है।
                                            
6. धुलि खेल
यह प्राचीन गांव काठमांडू के उत्तरी भाग में 30 किमी की दूरी पर स्थित है। यह नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर है। यह जगह अपनी खूबसूरती और परंपरा के लिए जानी जाती है।
                                     
7. गोरखा
गोरखा काठमांडू और पोखरा के बीच में है। काठमांडू से पोरखा की ओर 118 किमी चलना के बाद अबू खैरनी जगह आती है और यहां से 18 किमी पर पूर्व में जाने पर राजा पृथ्वी नारायण शाह का जन्म स्थल आता है। शाह देव डेस्टिनी के ये सबसे पहले राजा थे। हिमालय पर खूबसूरत  जगह है जिसे गोरखा दरबार कहते है। यहां किला और मंदिर दोनों ही पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं। इसे 1606-1636 में राजा राम शाह ने बनवाया था। गोरखा नाथ और काली मंदिर का आर्किटेक्चर अपने आप में अनोखा है
                           
8. लुम्बिनी
इस जगह को राजकुमार सिद्धार्थ की जन्मस्थली माना जाता है, जो 250 किमी काठमांडू के पश्चिम-दक्षिण की ओर स्थित है। सम्राट अशोक ने इस जगह पर टूटे एक खंभे का निर्माण 249 ईसा पूर्व में करवाया था। सम्राट ने इस जगह पर तीन तीर्थस्थान और बनवाए थे। लुम्बिनी ऐसा तीर्थस्थल है, जो दुनियाभर में पहचाना जाता है। नेपाल की सरकार ने 1985 में लुम्बिनी डेवलपमेंट ट्रस्ट बनाया, ताकि इस जगह की देखभाल बेहतर तरीके से हो सके। यहां के पूर्व-दक्षिणी क्षेत्र में पुरातत्व महत्व का स्थल तिलौराकोट है। इस जगह को कपिल वास्तु के नाम से भी जाना है, जो राजा सुबोधाना की राजधानी रही है|
            
9. मुक्तिनाथ
यह जगह हिंदुओं के तीर्थस्थान के रूप में जानी जाती है। भगवान मुक्ति नाथ का प्रसिद्ध मंदिर मस्तुंग जिले में स्थित है। यह मंदिर ऊंची पहाड़ी पर बना है और ज्यादातर लोग यहां हिंदुओं के मुख्य त्योहारों पर दर्शन करने आते हैं।
       
10. पशुपतिनाथ मंदिर
पशुपतिनाथ मंदिर काठमांडू के पूर्वी हिस्से में बागमती नदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर हिन्दू धर्म के आठ सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। नेपाल में यह भगवान शिव का सबसे पवित्र मंदिर है। यह मंदिर दुनियाभर के हिंदू तीर्थ यात्रियों के अलावा गैर हिन्दू पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी है। पशुपतिनाथ मंदिर की सेवा आदि के लिए 1747 से ही नेपाल के राजाओं ने भारतीय ब्राह्मणों को आमंत्रित करना शुरू किया था। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मल्ला राजवंश के एक राजा ने एक दक्षिण भारतीय ब्राह्मण को पशुपतिनाथ मंदिर का प्रधान पुरोहित नियुक्त किया था। दक्षिण भारतीय भट्ट ब्राह्मण ही इस मंदिर के प्रधान पुजारी नियुक्त होते हैं|

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